Ekadashi • Nirjala Ekadashi • Vrata • Hinduism: निराजली एकादशी ब्रत का जाने तारीख तथा पूजा बिधि

Ekadashi • Nirjala Ekadashi • Vrata • Hinduism: निराजली एकादशी ब्रत का जाने तारीख तथा पूजा बिधि



एकादशी के व्रत रखने वालों श्रद्धालुओं के लिए सबसे अहम बात यह होती है कि उनको पता होना चाहिए की एकादशी कब है तथा कितने समय से एकादशी का समय उत्पन्न यानी कि शुरू होता है तथा कब उनका पारण करना चाहिए और एकादशी के बारे में उनका पूरा ज्ञान होना चाहिए तो हम आपको इसमें बताएंगे हालांकि अब की बार जून के महीने में जो भी एकादशी आने वाला है वह निर्जला करण होगा मतलब की निर्जलीकरण एकादशी होगा वैसे तो हम आपको बता दें कि साल भर के अंदर 24 एकादशी तिथि आती हैं यानी 1 महीने में दो बार एकादशी तिथि आता है इस एक महीने में दो बार एकादशी के व्रत रखने वाले श्रद्धालु को भी निर्जलीकरण रखना चाहिए इसके साथ-साथ जो लोग साल भर का 24 एकादशी व्रत नहीं रख पाते हैं उनके लिए साल भर में एक बार निर्जलीकरण एकादशी व्रत आता है जिसको मनुष्य पूरा करके साल भर के 24 सो एकादशी व्रत का फल प्राप्त कर सकता है इसके लिए कुछ पौराणिक कथाएं उपलब्ध हैं जो हमने आपको नीचे बताए हैं कि निर्जलीकरण व्रत क्यों मनाया जाता है तथा इसके पीछे का राज क्या है इसके साथ साथ हम आपको बता दें कि 2020 में निर्जलीकरण एकादशी व्रत 2 जून को मनाया जाएगा तथा अगर हम लोग गंगा दशहरा की बात करें तो 1 जून को गंगा दशहरा मनाया जाता है मतलब की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है और एकादशी को निर्जलीकरण एकादशी व्रत रखा जाता है कभी-कभी ऐसा होता है कि गंगा दशमी पहले पढ़ता है और एकादशी बाद में पड़ता है लेकिन दो-तीन सालों के रिकॉर्ड में देखा जाता है कि एकादशी और गंगा दशमी दोनों एक ही कृषि में पढ़ते हैं यानी एक ही दिन मनाया जाता है

निराजली एकादशी ब्रत समय व तिथि (nirjala Ekadashi samay v tithi)


निर्जला एकादशी मंगलवार, जून 2, 2020 को
एकादशी तिथि प्रारम्भ – जून 01, 2020 को 2:57 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – जून 02, 2020 को 12:04 पी एम बजे
3 जून को , पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 05:23 ए एम से 08:10 ए एम

निर्जला एकादशी होने के पौराणिक कथाएं

पुराणों के कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि पांचों पांडवों में से सभी लोग भीम और अर्जुन युधिष्ठिर कुंती नकुल सहदेव सभी लोगों में से भीमसेन बहुत ही ज्यादा खाने पीने वाले आदमी थे मतलब कि यह कोई भी व्रत नहीं रख पाते थे किसी भी व्रत को यह नहीं रख पाते थे थे क्योंकि उनसे अपने भूख और प्यास सहन नहीं होता था इस प्रकार से एकादशी आता था और चला जाता था साल भर के अंदर यह एक भी मतलब की कोई भी व्रत नहीं रख पाते थे इनको हमेशा चिंता बनी रहे थे कि भगवान विष्णु का हम विरोध कर रहे हैं उनका व्रत ना करके इसके साथ-साथ इस चिंता को लेकर के बाद व्यास जी के पास पहुंचे महर्षि व्यास जिसे उन्होंने अपना चिंता व्यक्त किया और तब वेदव्यास जी ने उनको इसका सरल उपाय बताया कि अगर आप कोई भी व्रत नहीं रख पाते हैं तो आप निराज अली व्रत यानी कि साल भर में सिर्फ एक बार अगर व्रत रख लेते हैं एक दिन तो आपको 24 एकादशी व्रत होने का फल प्राप्त होगा इस प्रकार से भी हमसे इस व्रत का पालन करते हैं और उनको सभी एकादशी का फल प्राप्त हो जाता है अभी से यह और भी ज्यादा इसकी वैल्यू बढ़ गई है और लोगों के द्वारा जो लोग साल भर में सभी एकादशी व्रत को नहीं रह पाते हैं या रहने में अच्छा मैं है उनके लिए यह सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं कि वह 1 दिन साल भर में व्रत रहें और अपने फल को प्राप्त करें

निर्जला एकादशी व्रत क्या है

वैसे तो निराज अली का सामान्य अर्थ होता है बिना कुछ खाए पीए यानी कि पानी नहीं पीना लेकिन इसमें कुछ श्रद्धालुओं के द्वारा यह व्रत बहुत ही ज्यादा अच्छे से निभाया जाता है जिसमें ना तो खाना खाना रहता है ना ही किसी प्रकार का पानी पीना रहता है मतलब कि कुछ ना खाना न थी ना जब तक इस मुहूर्त का समय रहता है तब तक से भगवान विष्णु के भक्ति में रमे रहते हैं निर्जला एकादशी का अर्थ होता है कि बिना जल के व्रत रहना तथा जो अन्य सामान्य एकादशी होते हैं उसमें पानी को पीना रहता है और इसके साथ साथ में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो व्रत में खाने के लिए उपयोग किए जाते हैं उन खाद्य पदार्थों को खाते हैं भोजन का उपयोग नहीं किया जाता है हराहरी खाद्य पदार्थ है खाते हैं हम आपको बता दें कि सामान्य एकादशी भी जो लोग नहीं रख पाते हैं गांव में ज्यादातर यही होता है कि गांव में ही नहीं बल्कि लोगों को भी ऐसा करना चाहिए जो लोग कोई भी व्रत नहीं रख पाते हैं कम से कम उस दिन हुए लोग सिर्फ भोजन में चावल ना खाएं यानी कि चावल नहीं खाया जाता है भोज पदार्थ आप लोग ग्रहण कर सकते हैं इससे क्या होता है कि आप लोगों को व्रत रहने का और व्रत ना रहने का इन दोनों के बीच का फल प्राप्त होता है तो आप लोग ऐसा भी कर सकते हैं

निर्जला एकादशी या एकादशी में किस देवता का पूजा किया जाता है

हम आपको बता दें कि मेरा जली एकादशी असामान्य एकादशी सामान्यतः भगवान विष्णु के लिए यह तिथि होता है तथा अतिथि भगवान विष्णु का माना जाता है उन्हीं के के लिए यह व्रत रखा जाता है और लोगों के द्वारा यह व्रत रखा जाता है और उनके मनचाहा वर प्राप्त होता है मतलब कि उन लोगों का मनोकामना पूर्ण होता है जो बहुत ही ज्यादा श्रद्धा से इनकी भक्ति करते हैं और इनके नियमों का पालन करते हैं तो इस दिन अगर आप लोग इनके भक्ति श्रद्धा और मन से करते हैं तो आप लोगों का मनोकामना जरूर पढ़ा होगा इसमें भगवान विष्णु की पूजा किया जाता है तो आप लोग इसमें भगवान विष्णु की पूजा करें और अपने मन को स्थिर बनाए रखें
हम आपको बता दें दोस्तों की गूगल में लोग तरह-तरह के केवट सर्च करते हैं इनमें से यह सारी के वार्डो का आपको आंसर मिला है मतलब कि दिया गया है इन सभी चीजों के बारे में बताया गया है जो कि नीचे लोग सर्च करते हैं

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